राजनांदगांव। शहर में निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक फड़नवीस ने नगर निगम प्रशासन से प्रत्येक निर्माण स्थल पर सिटीजन इनफार्मेशन बोर्ड लगाना अनिवार्य करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सड़क, नाली और भवन निर्माण पर खर्च होने वाली राशि, कार्य की समय-सीमा, तकनीकी विवरण और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि नागरिक भी विकास कार्यों की निगरानी कर सकें।
फड़नवीस ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2012 और 2016 में निर्माण कार्यों में पारदर्शिता के लिए निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद कई निर्माण स्थलों पर जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं रहती। सूचना बोर्ड पर कार्य शुरू होने की तारीख, स्वीकृत राशि, निर्माण की लंबाई, चौड़ाई, मोटाई और संबंधित इंजीनियर का नाम व मोबाइल नंबर दर्ज होना चाहिए। भवन निर्माण के मामले में भी स्वीकृत राशि और तकनीकी विवरण प्रदर्शित किए जाएं।
फड़नवीस ने आरोप लगाया कि नगर निगम क्षेत्र में पिछले दो वर्षों के दौरान सड़कों के डामरीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन कई सड़कों की स्थिति कुछ ही महीनों में खराब हो गई। कहीं डामर की परत उखड़ रही है, तो कहीं गड्ढों और धूल की समस्या सामने आ रही है। इससे दोबारा मरम्मत पर राशि खर्च करनी पड़ती है और जनता के पैसे के सदुपयोग पर सवाल उठते हैं।
उन्होंने मांग की कि सड़कों की गुणवत्ता की नियमित जांच हो तथा निर्माण में लापरवाही या तकनीकी खामी मिलने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। निर्माण के दौरान इंजीनियरों की मौजूदगी और निगरानी सुनिश्चित करने के साथ सामग्री की गुणवत्ता तथा डामर की निर्धारित मोटाई की भी जांच होनी चाहिए।
फड़नवीस ने कहा कि पुरानी सड़क के ऊपर बार-बार डामरीकरण करने से सड़क का स्तर बढ़ सकता है। इससे मकानों के प्रवेश द्वार और सड़क के बीच ऊंचाई का अंतर प्रभावित होने के साथ जल निकासी में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए डामरीकरण से पहले सड़क की स्थिति का तकनीकी आकलन किया जाए। जरूरत पड़ने पर पुरानी या क्षतिग्रस्त परत हटाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नई परत बिछाई जाए।
उन्होंने नगर निगम प्रशासन से शासन के पारदर्शिता संबंधी निर्देशों का पालन कराने, प्रत्येक निर्माण स्थल पर सूचना बोर्ड लगाने और काम पूरा होने के बाद भी उसकी गुणवत्ता की निगरानी करने की मांग की। उनके अनुसार, निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित होने से सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग होगा और नागरिकों को बार-बार खराब सड़कों की समस्या से राहत मिल सकेगी।










