नाबालिग से दुष्कर्म और जबरन देह व्यापार कराने वाले 5 दोषियों को 20-20 साल की कैद, एक बरी

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राजनांदगांव। विशेष सत्र न्यायालय (पॉक्सो) ने छुरिया थाना क्षेत्र के बहुचर्चित एवं गंभीर मामले में ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने एक नाबालिग बालिका का अपहरण कर उसके साथ शारीरिक शोषण करने और जबरन देह व्यापार कराने के जुर्म में 5 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20.20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहींए साक्ष्यों के अभाव में एक अन्य आरोपी को बरी कर दिया गया है।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अनिल बारा की अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता के बयानों को आधार मानते हुए यह कठोर फैसला सुनाया।

विवाह का झांसा देकर किया था अपहरण
मामला छुरिया थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता (नाबालिग) को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया गया था। इसके बाद आरोपियों द्वारा उसका शारीरिक शोषण किया गया और जबरन वैश्यावृत्ति के दलदल में धकेल दिया गया। पुलिस ने पीड़िता की रिपोर्ट पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे बरामद किया और मामले में संलिप्त कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर चालान न्यायालय में पेश किया था।

इन दोषियों को मिली 20-20 साल की सजा
न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और पुलिस विवेचना के आधार पर निम्नलिखित 5 आरोपियों को दोषी पाते हुए 20-20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, जिसमें साधना वैष्णव उर्फ संध्या, श्री कुमारी उर्फ मुस्कान, चेतन, धनंजय एवं तोरण शामिल है।

पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर एक आरोपी रिहा
मामले की सुनवाई के दौरान 6वें आरोपी गोपीराम कोल के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य और संलिप्तता के ठोस प्रमाण नहीं पाए गए। इसके चलते न्यायालय ने उसे संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।

अदालत में प्रभावी पैरवी
प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रिया कांकरिया ने पैरवी करते हुए पीड़िता के पक्ष में कड़े साक्ष्य प्रस्तुत किए और दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग की। वहीं बरी हुए आरोपी गोपीराम कोल की ओर से अधिवक्ता हर्ष राय ने विधिक तर्क प्रस्तुत किए थे।