राजनांदगांव। जिला कांग्रेस कमेटी राजनांदगांव के प्रवक्ता अनीस खान ने कहा कि मीडिया में प्रसारित वीडियो के अनुसार, 2 अगस्त को रायपुर में आयोजित नए आपराधिक कानूनों के माध्यम से डिजिटल न्याय को सशक्त बनाने विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान मीडिया से चर्चा में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं कह चुके हैं कि स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता नहीं है। वहीं 2 अप्रैल 2026 को लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी स्पष्ट कहा था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर सभी उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य नहींए बल्कि वैकल्पिक व्यवस्था है।
अनीस खान ने कहा कि जब केंद्र के ऊर्जा मंत्री और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दोनों स्पष्ट कर चुके हैं कि स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं है, तो छत्तीसगढ़ सरकार यह बताए कि प्रदेशभर में आम उपभोक्ताओं के घरों में उनकी सहमति के बिना किसके आदेश पर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं, यदि यह व्यवस्था वैकल्पिक है, तो बिजली विभाग और निजी एजेंसियां इसे व्यवहार में अनिवार्य क्यों बना रही हैं? सरकार इस संबंध में लागू वैधानिक आदेश, अधिसूचना अथवा नियम सार्वजनिक करें।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे समय में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद प्रदेश की जनता बढ़ते बिजली बिलों और उन पर पड़ रहे अतिरिक्त आर्थिक बोझ से परेशान है। इन्हीं जनसमस्याओं को लेकर प्रदेश कांग्रेस पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन कर रही है।
अनीस खान ने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर किसके आदेश पर निजी कंपनियों के ठेकेदार बिना उपभोक्ता की सहमति के घर-घर पहुंचकर पुराने मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगा रहे हैं? यदि स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं है, तो ऐसी कार्रवाई किस कानूनी अधिकार के तहत की जा रही है? सरकार और विद्युत विभाग को इसका स्पष्ट एवं सार्वजनिक उत्तर देना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार तत्काल सार्वजनिक रूप से घोषणा करे कि स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं, बल्कि पूर्णतः वैकल्पिक व्यवस्था है। साथ ही छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) सभी जिलों के मुख्य कार्यपालन अभियंताओं को निर्देश जारी करे कि वे प्रेस विज्ञप्ति, प्रेस वार्ता अथवा सार्वजनिक सूचना के माध्यम से प्रत्येक जिले के उपभोक्ताओं को स्पष्ट रूप से अवगत कराएं कि स्मार्ट मीटर लगवाना पूरी तरह स्वैच्छिक है। इसके अतिरिक्त, जिन उपभोक्ताओं के यहां उनकी सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, उन्हें सरल आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से पुनः पूर्व का मीटर लगवाने का विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
अनीस खान ने कहा कि जब केंद्र सरकार के ऊर्जा मंत्री और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दोनों सार्वजनिक रूप से स्मार्ट मीटर को वैकल्पिक बता चुके हैं, तब छत्तीसगढ़ सरकार को भी इस विषय पर अपना स्पष्ट और लिखित रुख घोषित करते हुए प्रदेश में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाए जाने की कार्रवाई तत्काल रोकनी चाहिए।










