राजनांदगांव। राजनीतिक आयोजनों में भीड़ जुटाने और अपनी कुर्सी चमकाने के लिए अब जिम्मेदार अधिकारी मासूम बच्चों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था से खिलवाड़ करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। राजनांदगांव जिले में एक ऐसा ही बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना मामला सामने आया है, जहां राजनेता की अगवानी और भीड़ जुटाने के लिए स्वामी आत्मानंद स्कूल (बक्शी स्कूल) के विद्यार्थियों की चल रही त्रिमाही परीक्षा को अचानक बीच में ही रद्द करा दिया गया। इतना ही नहीं, परीक्षा दे रहे बच्चों को जबरन कार्यक्रम स्थल भेज दिए जाने का गंभीर आरोप है। इस घटना को लेकर पालकों और छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ऑडिटोरियम की ‘भीड़’ के लिए बलि चढ़ी परीक्षा
मंगलवार को राजनांदगांव के स्थानीय ऑडिटोरियम में ‘सेवा संकल्प कार्यक्रम’ का भव्य आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में राज्य के उप-मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) समेत कई उच्चस्तरीय जनप्रतिनिधियों का आगमन हुआ था। चर्चा है कि नेताओं की वाहवाही लूटने और ऑडिटोरियम की कुर्सियों को भरने के नायाब तरीके के तहत, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) प्रवास सिंह बघेल के इशारे पर बक्शी स्कूल में चल रही महत्वपूर्ण त्रिमाही परीक्षाओं को आनन-फानन में स्थगित करवा दिया गया। आरोप है कि परीक्षा हॉल में बैठे बच्चों को कॉपियां समेटकर सीधे कार्यक्रम स्थल पर भीड़ बढ़ाने के लिए भेज दिया गया।
एसोसिएशन ने खोला मोर्चा, डीईओ को हटाने की मांग
इस सनसनीखेज घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
श्री पॉल ने बेहद तल्ख लहजे में कहा, “प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा राजनीतिक कार्यक्रमों और नेताओं के स्वागत के लिए मासूम विद्यार्थियों की परीक्षाओं की बलि चढ़ाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, अशोभनीय और निंदनीय है। शिक्षा मंदिर जैसी पवित्र जगहों का इस तरह राजनीतिक इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
निष्पक्ष जांच और निलंबन की पुरजोर मांग
छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने जिला प्रशासन को चेतावनी देते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। एसोसिएशन ने इस गंभीर लापरवाही के मुख्य दोषी प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की है। पालकों का कहना है कि यदि दोषियों पर जल्द कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
बहरहाल, शिक्षा विभाग के इस मनमाने रवैये से पालकों में जबरदस्त गुस्सा है और पूरे शहर में यह घटना चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।










