राजनांदगांव। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला सोमनी में अंतरराष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, निशुल्क विधिक सहायता, बाल संरक्षण कानून और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। मुख्य अतिथि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीति नागवंशी ने विद्यार्थियों से संवाद कर पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों को समझाया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रीति नागवंशी ने कहा कि न्याय पाने का अधिकार समाज के प्रत्येक व्यक्ति को है। आर्थिक स्थिति या कानूनी जानकारी की कमी किसी के न्याय प्राप्त करने में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने विधिक सेवा दिवस के उद्देश्य और महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण जरूरतमंद लोगों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कार्य करता है।
उन्होंने बच्चों को लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट) के बारे में बताया। विद्यार्थियों से सवाल पूछकर उनकी समझ परखी और व्यक्तिगत सुरक्षा तथा अनुचित व्यवहार के प्रति सतर्क रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के शोषण, परेशानी या अनुचित व्यवहार की स्थिति में चुप रहने के बजाय विश्वसनीय अभिभावक, शिक्षक या संबंधित अधिकारी को जानकारी दें।
जन कल्याण सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि न्याय प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आर्थिक रूप से कमजोर और अन्य पात्र जरूरतमंद लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराता है। इसके तहत पात्र व्यक्तियों को निशुल्क अधिवक्ता, कानूनी सलाह और न्यायिक प्रक्रिया में सहायता प्रदान की जाती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि कानून की जानकारी केवल अधिवक्ताओं और न्यायालयों तक सीमित नहीं है। प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी जानकारी होनी चाहिए। जागरूक विद्यार्थी आगे चलकर समाज में कानूनी जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
वरिष्ठ समाजसेवी राकेश ठाकुर ने व्यावहारिक उदाहरणों और संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को कानून तथा सामाजिक जिम्मेदारियों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि जागरूक नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा करने के साथ दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करता है। विद्यार्थियों को अनुशासन, जिम्मेदारी और कानून के प्रति सम्मान की भावना विकसित करनी चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं समाजसेवी अमलेंदु हाजरा ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से विद्यार्थियों की कानूनी विषयों से जुड़ी जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने सरल उदाहरणों से विभिन्न कानूनी प्रावधानों और विधिक सहायता के बारे में बताया। विद्यार्थियों ने भी सवाल पूछकर अपनी शंकाएं दूर कीं।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कम उम्र से ही बच्चों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और बाल संरक्षण संबंधी कानूनों की जानकारी देना जरूरी है। इससे वे जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।
इस अवसर पर शाला की प्राचार्य सविता अवस्थी, व्याख्याता जीडी गुरु, सुनील भागवत सहित विद्यालय के शिक्षक-कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।








