निर्वाचन आयोग द्वारा फॉर्म 6 से कटे मतदाताओं के नाम जोड़ना अवैध : अशोक फड़नवीस

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राजनांदगांव। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के बीच प्रपत्र-6 (फॉर्म 6) के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद अशोक फड़नवीस ने निर्वाचन आयोग के इस कदम को पूरी तरह से अवैध और नियमों के विपरीत बताया है। उन्होंने कहा कि फॉर्म 6 का उपयोग केवल नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए निर्धारित है, न कि पूर्व में हुए एसआईआर से कटे हुए मतदाताओं के नाम पुनर्बहाल करने के लिए।

श्री फड़नवीस ने निर्वाचन आयोग के नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि नियम 13(1)26 के तहत प्ररूप-6 केवल उन युवाओं या नागरिकों के लिए है जिन्होंने अपनी उम्र 18 वर्ष पूर्ण कर ली है और किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में पूर्व में कभी आवेदन नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग वर्तमान में बीएलओ को घर-घर भेजकर एसआईआर के तहत कटे हुए पुराने मतदाताओं से भी फॉर्म 6 भरवा रहा है, जो कि सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।

अशोक फड़नवीस ने ध्यानाकर्षण कराते हुए बताया कि फॉर्म 6 के कॉलम में स्पष्ट रूप से यह घोषणा (शपथ पत्र) ली जाती है कि मैं निर्वाचन नामावली में सम्मिलित किए जाने के लिए पहली बार आवेदन कर रहा हूं और मेरा नाम किसी भी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में सम्मिलित नहीं है।

यदि कोई पूर्व मतदाता यह फॉर्म भरता है, तो यह शपथ पत्र असत्य साबित होगा। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 के तहत गलत जानकारी या असत्य घोषणा देने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। ऐसे में यदि कटे हुए मतदाता या बीएलओ इस फॉर्म का गलत उपयोग करते हैं, तो उन पर कानूनी कार्रवाई का खतरा मंडरा सकता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि निर्वाचन आयोग की इस दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के कारण देश के करोड़ों मतदाताओं के नाम सूची से गायब हो गए हैं। आयोग के पास मतदाताओं के नाम काटने का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने मांग की है कि आयोग नियमपूर्वक पूर्व की मतदाता सूची को ही बहाल (जारी) करे और एसएसआर प्रक्रिया के तहत बीएलओ के माध्यम से डोर-टू-डोर निरीक्षण करवाकर छूटे हुए मतदाताओं के नाम पुनः दर्ज करे।