राजनांदगांव। शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और विवेक को बनाए रखना भी जरूरी है। इसी विषय पर संस्कार सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, राजनांदगांव और अपोलो कॉलेज, अंजोरा, दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें विशेषज्ञों ने एआई के जरिए शिक्षण-अधिगम को प्रभावी बनाने के साथ शैक्षणिक ईमानदारी, डेटा गोपनीयता और मानवीय मूल्यों के संरक्षण पर विचार रखे।
संगोष्ठी का विषय ‘एजुकेशन इन द एआई एरा : रीथिंकिंग टीचिंग, लर्निंग एंड ह्यूमन वैल्यूज’ था। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कार सिटी कॉलेज ऑफ एजुकेशन की प्राचार्य डॉ. गुरप्रीत कौर ने की। मुख्य अतिथि अपोलो कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. राखी शर्मा और विशिष्ट अतिथि संस्कार सिटी इंटरनेशनल स्कूल की प्राचार्य श्रीमती रेखा तिवारी थीं। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना और राजकीय गीत से हुआ। श्रीमती पूजा श्रीवास्तव और श्रीमती शालिनी साहू ने स्वागत भाषण दिया।
संगोष्ठी में अभिजात मिश्रा, एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, पावरवोल्ट ग्रुप; डॉ. दिव्या शर्मा, चेयरपर्सन, वीतरागा रिसर्च फाउंडेशन, रायपुर; डॉ. आभा दुबे, डीन, फैकल्टी ऑफ एजुकेशन, कोलंबिया प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, रायपुर; डॉ. अरुण कुमार दुबे, डायरेक्टर, आईक्यूएसी, कोलंबिया प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी तथा प्रो. डॉ. लुभावनी त्रिपाठी, फैकल्टी ऑफ एजुकेशन, कलिंगा यूनिवर्सिटी, रायपुर ने विचार रखे।
वक्ताओं ने शिक्षा में एआई के उपयोग, शोध की नई संभावनाओं, डिजिटल शिक्षण सामग्री तैयार करने तथा विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन और रचनात्मकता विकसित करने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग करते समय शैक्षणिक ईमानदारी, नैतिकता और डेटा की गोपनीयता का ध्यान रखना जरूरी है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. गुरप्रीत कौर ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और विवेक का विकास करना भी है। एआई शिक्षकों की भूमिका समाप्त नहीं करता, बल्कि उनकी शिक्षण क्षमता को और मजबूत बनाता है।
मुख्य अतिथि डॉ. राखी शर्मा ने कहा कि एआई से शिक्षा में नवाचार और गुणवत्तापूर्ण अधिगम को बढ़ावा मिल सकता है। शिक्षकों और शोधार्थियों को आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक रहकर उनका सकारात्मक और जिम्मेदार उपयोग करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि श्रीमती रेखा तिवारी ने कहा कि भविष्य की शिक्षा में तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय मूल्यों का समन्वय आवश्यक है।
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों और शोधार्थियों ने अपने विचार व अनुभव साझा किए। एआई के शैक्षणिक उपयोग, शोध पद्धति, नवाचार और भविष्य की शिक्षा पर पैनल चर्चा भी हुई। समापन अवसर पर श्रीमती किरण सोनटिया ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, शोधार्थियों, आयोजन में सहयोग देने वाले सदस्यों और छात्र-छात्राओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।










