छुईखदान जनपद पंचायत में प्रभारी CEO को लेकर बढ़ा प्रशासनिक विवाद, दो-तिहाई सदस्यों ने खोला मोर्चा

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खैरागढ़/छुईखदान। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की जनपद पंचायत छुईखदान में प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के पद पर एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति और उनके अधिकारों को लेकर गंभीर प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। निर्वाचित सभापतियों और दो-तिहाई से अधिक जनपद सदस्यों ने एक अराजपत्रित कर्मचारी को संपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय प्रभार सौंपे जाने पर कड़ा विरोध जताया है। सदस्यों ने कलेक्टर सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर प्रभारी सीईओ को तत्काल हटाने और मामले में लिखित निर्णय देने की मांग की है।

सदस्यों ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के दिशा-निर्देशों तथा वित्त विभाग के आदेशों का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि एक अराजपत्रित तृतीय श्रेणी कर्मचारी को आहरण एवं संवितरण सहित संपूर्ण वित्तीय अधिकार किस नियमावली के तहत दिए गए हैं। निर्वाचित प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रभार आदेश की वैधानिकता पर अंतिम निर्णय लेने में समय लग रहा है, तो अंतरिम व्यवस्था के तौर पर वित्तीय प्रभार तत्काल किसी सक्षम अधिकारी को सौंपा जाना चाहिए। इसके अलावा, छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 47 के तहत सामान्य प्रशासन समिति के सचिवीय अधिकारों को लेकर भी कलेक्टर से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।

मामले का एक अत्यंत संवेदनशील पहलू आगामी बैठकों के दौरान निर्वाचित सदस्यों की सुरक्षा से जुड़ा है। पूर्व में हुए विवादों की पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए सदस्यों ने आशंका जताई है कि सामान्य सभा और सामान्य प्रशासन समिति की बैठकों के दौरान विवाद खड़ा कर उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फँसाया जा सकता है। इस आशंका को देखते हुए 23 अक्टूबर को होने वाली बैठकों की शुरुआत से अंत तक निरंतर वीडियोग्राफी कराने तथा जिला प्रशासन की ओर से किसी सक्षम राजपत्रित अधिकारी को पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) नियुक्त करने की पुरजोर मांग की गई है।

जनपद सदस्यों ने आरोप लगाया है कि प्रभारी CEO द्वारा लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है। संचार एवं संकर्म स्थायी समिति की बैठकों में नस्तियों (फाइलों) का अवलोकन कराने से मना करने पर उनके खिलाफ जनपद से निलंबन का प्रस्ताव भी पारित हो चुका है। इसके अतिरिक्त, कलेक्टर और राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण कर जनपद अध्यक्ष व सभापतियों के निर्णयों को एकतरफा निरस्त करने, 15वें वित्त आयोग की राशि में मनमाने बदलाव, निर्माणाधीन भवनों का बिना मापदंड प्रमाणीकरण, 25 साल पुराने कार्यालय भवन में बिना अनुमति तोड़फोड़ कराने तथा सरपंच-सचिवों पर गलत प्रक्रिया से जेम पोर्टल से खरीदारी का दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

जनपद पंचायत छुईखदान के दो-तिहाई से अधिक सदस्यों ने अपने हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन की प्रतियां पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, संचालक पंचायत (नवा रायपुर) और जिला पंचायत CEO प्रेम कुमार पटेल को भी प्रेषित की हैं। सदस्यों ने चेतावनी दी है कि बैठकों से पूर्व इस विषय पर वैधानिक स्थिति स्पष्ट की जाए। फिलहाल, पूरे मामले में अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और कलेक्टर के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।