हरेली तिहार के छत्तीसगढ़ ल गाड़ा गाड़ा बधाई : किसान नेता वीरेन्द्र सिंह तोमर

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रायपुर. राज्य के प्रमुख किसान नेता वीरेन्द सिंह तोमर ने छत्तीसगढ़वासियों को ‘पहिली तिहार : हरेली’ की बधाई दी है. उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी, कुटकी दाई सहित प्रकृति से अच्छी फसल के साथ साथ सुख, समृद्धि, शाँति और भाईचारे की कामना भी की है.

उल्लेखनीय है कि हरेली (हरियाली जोकि सावन की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है) को राज्य का पहला पारँपरिक त्योहार (पहिली तिहार) सदियों से माना जाता है. यह छत्तीसगढ़ी सँस्कृति से ओतप्रोत तिहार है.

0 हरेली का क्या है महत्व..?

छत्तीसगढ़ में तिहार मनाने का क्रम ‘हरेली’ से ही शुरू होता है. यहाँ की सँस्कृति मुताबिक प्रकृति के साथ साथ कृषि और जीव – जँतुओं की भी पूजा अर्चना करने का विधान कई सौ साल पुराना रहा है.

‘हरेली’ को लोक – जीवन, कृषि परँपरा और पर्यावरण – प्रेम का प्रतीक बताते हुए क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सिंह तोमर कहते हैं कि इसी से राज्य के प्रमुख लोक – पर्वों की श्रृँखला शुरू होती है.

क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष तोमर के मुताबिक हरेली तिहार पर कृषि यँत्रों की पूजा का विधान हमें हमारी माटी, सँस्कृति से भी जोड़ता है. वह यह सँदेश देता है कि ये यँत्र सिर्फ़ औजार नहीं बल्कि हमारे ऐसे भगवान हैं, देव हैं जोकि कृषि उत्पाद में हरसँभव हमारी मदद करते हैं.

करणी सेना के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष तोमर कहते हैं कि हरेली तिहार में पशुधन का सत्कार भी किया जाता है. बैलों सहित गायों की पूजा कर आशीर्वाद लेना हमें जीव जँतुओं के प्रति कृतज्ञता जताने के साथ साथ उनके प्रति नम्रता बरतने का सँदेश देता है.

भाई तोमर के शब्दों में इसके अलावा गेड़ी की पूजा कर पैरों की रक्षा की कामना करने का पर्व हरेली ही है. यह तिहार गेड़ी दौड़ सहित डंडा पचरंगा, अत्ती – पत्ती, फुगड़ी, बिल्लस, खो – खो जैसे पारँपरिक खेलों के जरिए स्वस्थ शरीर, स्वस्थ तन, स्वस्थ मन का भी सँदेश देता है.

बचपन से ही किसानी से जुड़े तोमर के शब्दों में बोबरा, खुरमी, ठेठरी, बड़ा, सोहारी, गुड़हा चीला, गुलगुला भजिया, अईरसा, चौसेला जैसे पारँपरिक पकवान हरेली में बनाए और खिलाए जाते हैं. कृषक परिवार से जुड़े वीरेन्द्र सिंह तोमर ने एक बार फिर ‘हरेली तिहार’ की बधाई दी है.