कवि साहित्यकारों ने थियेटर ग्रुप के महासंग्राम नाटकों की भूरि- भूरि प्रशंसा निर्भया एकल नाट्य ने दर्शकों को झकझोरा ग्लानि नाटक की प्रभावी प्रस्तुति ने लोगों की आंखों में लाया आंसू*

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*कवि साहित्यकारों ने थियेटर ग्रुप के महासंग्राम नाटकों की भूरि- भूरि प्रशंसा* *निर्भया एकल नाट्य ने दर्शकों को झकझोरा*,,,,, *ग्लानि नाटक की प्रभावी प्रस्तुति ने लोगों की आंखों में लाया आंसू*

राजनांदगांव – कला साहित्य की नगरी राजनांदगांव में शहर के थियेटर ग्रुप द्वारा नाटकों के महासंग्राम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें शहर सहित इंदौर, छिंदवाड़ा, रायपुर, दुर्ग धमतरी, आदि स्थानों के नाट्य ग्रूपो द्वारा अपनी प्रभावी प्रस्तुतियां दी और लोगों का दिल जीता। नाटकों के महासंग्राम रुपी इस कार्यक्रम के लिए शहर के रंगकर्मी शरद श्रीवास्तव द्वारा वरिष्ठ कवि साहित्यकार एवं लोक कला धर्मी आत्माराम कोशा “अमात्य” को उनकी पूरी साहित्यिक टीम के साथ विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया था।

श्री कोशा ने छत्तीसगढ़ साहित्य समिति की कवयित्री सुषमा शुक्ला अंशुमन, कवि/ कथाकार मानसिंह मौलिक, कवि एवं लोक कला धर्मी पप्पू पौर्वात्य’ कलिहारी, कवि रौशन साहू मोखला व स्वयं रंगकर्मी शरद श्रीवास्तव के साथ बैठकर नाटकों के मंचन देखे और प्रभावित हुए बिना नहीं रहे। खास कर देश की सबसे बड़ी निर्भया कांड को शहर की कलाकार ज्योति मागर द्वारा बड़े ही प्रभावी ढंग से दी गई प्रस्तुति देखकर लोग अपने आप को तालियां बजाने से रोक नहीं सके।

कलाकार की सधी हुई आवाज, बिंदास डायलॉग डिलीवरी और बेलाग प्रस्तुति ने लोगों के नाटक के अंत तक बांधे रखा।*कविताओं से हुई कार्यक्रम की शुरुआत*कार्यक्रम की शुरुआत कवि रौशन साहू “मोखला” की कविताओं से हुई। इस दौरान नाट्य स्पर्धा कार्यक्रम के जज ईरा फिल्म के निदेशक, रंगकर्मी संतोष जैन से श्री कोशा के साथ कवि साहित्यकारों ने मिलकर कला से संबंधित विचार साझा किए।नाटको के इस महा संग्राम में सबसे पहले प्रस्तुति धमतरी की नाट्य संस्था शाश्वत उत्सर्ग थियेटर ग्रुप द्वारा दी गई। इसी तरह निर्भया सहित “खलनायकम्” और “मैं कौन हूं” की एकल प्रस्तुति ने लोगों को प्रभावित किया।

नाटक के महासंग्राम में शहर की नाट्य संस्था इंद्रधनुष थियटर ग्रूप के कलाकार द्वारा खेले गए “ग्लानि” नामक नाटक ने अपने हृदय स्पर्शी डायलॉग व सधे हुए अभिनय से दर्शकों के आंखों में आंसू ला दिये।शहर के नाट्य कलाकार आनंद तिवारी द्वारा लिखित, निर्देशित और अभिनीत नाटक “ग्लानि” के एक-एक पात्रों ने प्रेक्षकों पर अपनी विशेष छाप छोड़ी। कला संगीत के पुजारी नाटक के नायक रामाधीन द्वारा गरीबी परिस्थितियों में भी अपने पुत्र को पढ़ा- लिखा कर आफिसर बनाने व अफसर बेटे द्वारा अपने बाप को शादी में बैड बाजा ट्रम्पेट बजाते देख अपने आप में ग्लानि महसूस करने के अनुभव की व्यथा – कथा को बड़े ही शिद्दत से मंचित किया गया। अंत में नायक रामाधीन के अपने बेटे की शान रखने शादी में ट्रंपेट बजाने छोड़ देने तथा अपने बाल सखा कलेक्टर मित्र की बेटी की शादी में ट्रंपेट बजाकर अपना प्राण त्याग देने की मर्माहत कर देने वाली इस नाटक ने लोगों की आंखों में आंसू लाने विवश कर दिया।

इसमें कलेक्टर के रूप में शहर के रंग सुधि आमोद श्रीवास्तव, उनकी धर्मपत्नी शोभांजलि श्रीवास्तव अफसर बेटे की भूमिका ने भी लोगों को प्रभावित किया। इस दौरान टीस ,गंज फूट इंच व पांचवां पराठा उफ़ राख ,वेलवेट ब्लाऊज आदि नाटक खेले गए।*नाटकों की दी गई यादगार प्रस्तुति* हालांकि नाटकों के इस महासंग्राम में उपरोक्त नाटकों की यादगार प्रस्तुतियां दी गई लेकिन इक्का – दुक्का को छोड़ दें तो ज्यादातर नाटकों में कसावट की कमी देखी गई। नाटकों में गति (टेम्पो) का अभाव बोझिल पैदा करने लगता था। देश के सुप्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर जी के नाटकों में छत्तीसगढ़ी लोक रंग शैली “नाचा” का फ्यूजन जो फैटेंसी रच देता था और चोर चरण दास, आगरा बाजार, पोंगवा- पंडित, लाला शोहरत राय, मिट्टी की गाड़ी,जैसे नाटकों को सुप्रसिद्धी के शिखर पर पहुंचा देने का काम करता था। वह कलाकारी महासंग्राम के नाटकों में कमी देखी गई।

शहर के रंगमंचीय कलाकार रितेश सिंघाड़े की संयोजना और अथक प्रयत्नों से मेडिकल कॉलेज हास्पीटल के सर्व सुविधायुक्त आडिटोरियम में आयोजित नाटकों के इस महासंग्राम कार्यक्रम का आनंद लेने के लिए नगर के हास्य कलाकार, सुदेश यादव, चिटरु “सुरेद्र चंद्राकर , विनोद गौतम ,बैंनेडिक्ट फ्रांसीस, मुन्ना बाबू ,दिनेश नामदेव, ज्योति वैंडे,, दीपिका दवे ,रागिनी, काजल,नागेश अनिकेत रुपेश, कन्हैया विश्वकर्मा फहीम खान भुनेश्वर, संकल्प तिवारी, नवीन रजक ऋषभ सिन्हा आदि सहित बड़ी संख्या में नाटक प्रेमी जन व नाट्य कलाकार उपस्थित थे। उक्ताशय की जानकारी छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति के सचिव मानसिंह “मौलिक” द्वारा दी गई। मो०बा० 9161318653