धर्म और समाज के प्रति जागरूकता: संस्कारधानी राजनांदगांव की दिशा और दशा

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धर्म और समाज के प्रति जागरूकता: संस्कारधानी राजनांदगांव की दिशा और दशा

राजनांदगांव — जब कोई व्यक्ति धर्म और समाज के प्रति जागरूक होता है, तो वह स्वयं को एक बेहतर नागरिक और जिम्मेदार मानव के रूप में ढालता है। छत्तीसगढ़ की यह सांस्कृतिक नगरी, संस्कारधानी राजनांदगांव, न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जानी जाती है, बल्कि यहां के लोग अपने आचरण, व्यवहार और कर्तव्यों में भी धर्म-संस्कारों को जीते हैं।

यहां के प्रमुख स्थल — शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय, शीतला मंदिर, गुरुद्वारा, राम मंदिर, मस्जिद, मकबरा, चर्च, मठ — न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि बौद्धिक और सामाजिक चेतना के प्रतीक भी हैं। यही कारण है कि यह नगरी विविधता में एकता का जीता-जागता उदाहरण है।

यदि आज का युवा अपने कर्तव्यों और संस्कारों को समझते हुए धर्म और समाज के प्रति अपनी निष्ठा को सशक्त बनाए, तो शहर में कभी-कभी उत्पन्न होने वाली अराजकता की जड़ें खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगी। युवावस्था का मार्ग कठिन अवश्य है, पर दिशा सही हो तो यही युवा शक्ति शहर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।राजनांदगांव की खूबी यह है कि यहां कुछ तो है, जो सभी को जोड़ कर रखता है।

सावन का महीना आ रहा है — कांवड़ यात्राएं, शिवभक्ति की उमंग, मोहर्रम की ताजिए दार परंपरा, गणेश उत्सव की झांकियां, और नवरात्र में देवी मां की आराधना — ये सब दर्शाते हैं कि यह शहर धर्म के माध्यम से समाज को जोड़ने की भूमिका निभा रहा है।छत्तीसगढ़ में जब कोई “संस्कारधानी” कहे, तो सबसे पहले नाम आता है राजनांदगांव का। यह केवल एक शहर नहीं, बल्कि एक विचार है — जहां आस्था, जागरूकता और सामाजिक एकता का संगम है। राजू डागा