स्कूली बच्चों के दुपहिया वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग

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राजनांदगांव। हिन्दू युवा मंच जिला इकाई ने जनदर्शन में स्कूली छात्र-छात्राओं के दुपहिया वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर कलेक्टर जितेन्द्र कुमार यादव को ज्ञापन सौंपा। स्कूली छात्र-छात्राओं को दुपहिया वाहन चलाते देखे जाने पर, अभिभावकों और स्कूल प्रशासन को पहले समझाईश देने और प्रतिबंध का उल्लंघन होने की स्थिति में अभिभावकों और स्कूल प्रशासन पर भी कार्यवाही करने की मांग की है।
उक्तशय की जानकारी देते हुए हिन्दू युवा मंच के जिला अध्यक्ष सुरेश लोहमार और शहर अध्यक्ष राजा ताम्रकार ने संयुक्त रूप से बताया कि, स्कूली छात्र-छात्राओं को दुपहिया वाहन चलाते देखना, उन्हें घर से स्कूल तक और स्कूल से वापस घर जाते देखना यह बात आम हो गई है और इसकी स्थाई रोकथाम के लिए जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन की तरफ से अब तक कोई प्रयास भी नहीं किए गए हैं।
आगे उन्होंने कहा किए सामान्यतः स्कूलों में बारहवीं तक की कक्षाएं लगती है और प्रायः बारहवीं तक के छात्र-छात्राओं की उम्र सोलह सत्रह वर्ष तक की होती है। इन स्कूली बच्चों के पास दुपहिया वाहन चलाने का कोई लाइसेंस भी नहीं होता, बावजूद वाहन चलाने पर कोई प्रतिबंधात्मक कार्यवाही भी नहीं की जाती है।
हिन्दू युवा मंच ने प्रशासन से सवाल किया है कि, जब लाइसेंस के अभाव में आम नागरिकों पर चलानी कार्यवाही होती है, तब इन छात्र-छात्राओं को भला किस महान कार्य के लिए छूट दी जाती है। ये स्कूली छात्र-छात्राएं, विशेषकर लड़के तेज रफ्तार से और लापरवाहीपूर्वक दुपहिया वाहन चलाते है, अपने सिर पर हेलमेट भी नहीं लगाते, बच्चे देश का भविष्य होते हैं, ऐसे में यदि तेज रफ्तार से और लापरवाहीपूर्वक दुपहिया वाहन चलाते समय कोई सड़क दुर्घटना हो जाती है तो इसकी नैतिक जिम्मेदारी भला कौन लेगा। वैसे इसे अनहोनी न कहकर, जानबूझकर जोखिम मोल लेना और बिन बुलाई दुर्घटना को न्यौता देना कहना ज्यादा सही होगा। ऐसा भी नहीं है कि, उक्त विषय की जानकारी जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन को न हो, यदा कदा इन्होंने भी स्कूली बच्चों को यूनिफॉर्म में वाहन चलाते स्वाभाविक तौर पर देखा होगा। बावजूद उन पर किसी भी प्रकार की चलानी कार्यवाही न करना प्रशासन की मौन सहमति ही कही जाएगी। आँखें मूंदने की बजाय बच्चों के पालकों और स्कूल प्रशासन को इसके लिए सख्त हिदायत दी जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की दुर्घटना के लिए अभिभावकों और स्कूल प्रशासन पर भी चलानी और दंडात्मक दोनों ही कार्यवाहियां की जानी चाहिए। साथ ही लापरवाहीपूर्वक और तेज रफ्तार से स्कूली छात्र-छात्राओं के दुपहिया वाहन की ठोकर से किसी मासूम या बेगुनाह के घायल होने की स्थिति में दुर्घटना का जिम्मेदार उनके अभिभावकों और स्कूल प्रशासन को मानकर, बड़े जुर्माने और कड़े दण्ड से दंडित कर साथ ही मुआवजे की भरपाई कराकर, पीड़ित को राहत दिलाई जानी चाहिए। इसका सकारात्मक प्रभाव यह पड़ेगा किए कानूनी कसावट बनी रहेगी और अभिभावक, बालिग होने के बाद ही अपने बच्चों को वाहन चलाने देंगे।