आगामी बजट से व्यापारियों को बड़ी उम्मीदें, कैट ने रखीं कई अहम मांगें

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आगामी बजट से व्यापारियों को बड़ी उम्मीदें, कैट ने रखीं कई अहम मांगें

राजनांदगांव।आगामी केंद्रीय बजट को लेकर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) एवं स्थानीय व्यापारी संगठनों ने सरकार से व्यापार हितैषी प्रावधान किए जाने की मांग की है।

कैट पदाधिकारियों व व्यापारियों का कहना है कि यदि बजट में टैक्स में राहत, सस्ते ऋण और स्थानीय व्यापार को संरक्षण देने वाली योजनाएं लाई जाती हैं, तो बाजार में आई सुस्ती दूर हो सकती है।

स्थानीय व स्वदेशी व्यापार संरक्षण पर जोरकैट के जिला अध्यक्ष राजू डागा ने कहा,“स्थानीय और स्वदेशी व्यापार को संरक्षण देना समय की आवश्यकता है।

आगामी बजट में यदि छोटे दुकानदारों, थोक व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए विशेष योजनाएं लाई जाती हैं, तो रोजगार बढ़ेगा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा मजबूत होगी।”महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रहे छोटे व्यापारीकिराना व्यापारी संजय लड्ढा ने कहा,“बढ़ती महंगाई और खर्चों के बीच व्यापार चलाना मुश्किल हो गया है।

बजट में यदि व्यापारियों को कम ब्याज दर पर ऋण और विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाता है, तो छोटे व्यापारियों को बड़ा संबल मिलेगा।”मंडी टैक्स में छूट की मांगकैट (Confederation of All India Traders) के संजय तेजवानी ने कहा,“आगामी बजट में मंडी टैक्स में छूट देकर भी व्यापार को बड़ा लाभ दिया जा सकता है।

मंडी शुल्क कम होने से थोक व खुदरा दोनों व्यापारियों को राहत मिलेगी और इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा।”ऑनलाइन डिलीवरी पर टैक्स लगाने की मांगकैट

व्यापारी संगठन के लक्ष्मण लोहिया ने कहा,“ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं पर 18 प्रतिशत टैक्स लगाया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिल सके। इससे असमान प्रतिस्पर्धा खत्म होगी और छोटे दुकानदारों को अपने व्यवसाय को बचाने का अवसर मिलेगा।”

सोना–चांदी पर टैक्स से बाजार में सुस्तीकैट के प्रदेश संरक्षक अनिल बरडिया ने कहा,“सोना और चांदी पर लगाए गए ऊंचे टैक्स के कारण बाजार में भारी सुस्ती आ गई है।

लगातार बढ़ती कीमतों से आभूषण बाजार प्रभावित हुआ है। कैट की मांग है कि सोने की कीमत पर लगाए जाने वाले टैक्स को 9 प्रतिशत से कम किया जाए, ताकि व्यापारी और उपभोक्ता दोनों को राहत मिल सके और बाजार में दोबारा रौनक लौटे।”फर्नीचर उद्योग के लिए जीएसटी राहत जरूरीफर्नीचर व्यापारी संगठन कैट से जुड़े सुरेश अग्रवाल ने कहा,“फर्नीचर पर वर्तमान में 18 प्रतिशत जीएसटी लगने के कारण बाजार में भारी सुस्ती है। यदि आगामी बजट में फर्नीचर पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत किया जाता है, तो फर्नीचर की मांग में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।

वर्तमान में प्लाईवुड की बिक्री में भी लगातार कमी आई है, ऐसे में टैक्स में राहत मिलने से फर्नीचर उद्योग और उससे जुड़े छोटे व्यापारियों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।”स्थानीय व्यापार मजबूत होगा, तभी रोजगार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था सशक्त बनेगी।